KAB TAK TUM PE MARTA RAHUNGA -कब तक तुम पे मरता रहुंगा- KANHA KAMBOJ

Poetry Details:-

KAB TAK TUM PE MARTA RAHUNGA -कब तक तुम पे मरता रहुंगाइस पोस्ट मे कुछ कविताये प्रस्तुत की गयी है जो कि KANHA KAMBOJ के द्वारा लिखी और प्रस्तुत की गयी है।

जिंदगी अब और पामाल नही कर सकते
तेरे जाने का अब और मलाल नही कर सकते
तेरे अब कोई खत नही मेरे घर
तेरे घर की मगर पड़ताल नही कर सकते
जो जादू किया है उसकी आवाज ने
यार कोई सुर ताल नही कर सकते
मुझ पे घर की भी जिम्मेदारियाँ है
हम तो मजनु जैसा भी हाल नही कर सकते
दुख तो बहुत है तेरे आशिको के मगर
मसला ये भी है के हड़ताल नही कर सकते
एक तेरा ही नंबर है मेरी काँल लिस्ट में
एक तेरा ही नंबर है जिस पे हम काँल नही कर सकते
वो वफा पर शेर कहता है उसे शर्म नही
लोग भी वाह करते है सवाल नही कर सकते

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गर एक तरफा ही हम तुम पर मरते रहेंगे
तो जान ऐसा हम कब तक करते रहेंगे
दोस्त बन कर रहते है ना दोस्त
आशिक़ी में तो हम तुम मरते रहेंगे
बेशक रहेंगे तेरे कदमो में हम
जमाने के तो हम सर पर चढ़ते रहेंगे
कही आंख ही न बह जाए आँसुओ में
बेहतर पागल ही कर दो मुसलसल हँसते रहेंगे
क्यों सुने किस्से मोहब्बत के फिर
जब हर कहानी में आशिक़ ही मरते रहेंगे
आपको बस हम ही से है मोहब्बत
आप ये कहने में कब तक डरते रहेंगे

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तू हर दफा अपनी चला “बस कर”
मुझे सबसे ज्यादा ये खला “बस कर”
चीखते रहे तेरा नाम तूने ना सुना
फिर चीख उठा मेरा गला “बस कर”
तुम चाहती हो हम भी हो जाये बेवफा
नही सीखनी तुम से ये कला “बस कर”
मै बेहया,बेरहम,बेगैरत
अब और कुछ ना कह भला “बस कर”

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तुम्हारा हर जख्म हम गवारा केहते है
है यही सच लो हम दोबारा केहते है
नही मिलना तो जान साफ कह दीजिऐ
नजर झुकाने को तो हम इशारा केहते है

 

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