कवि बलराम बल्लू का ये वीडियो जिसमें उन्होंने भगवान श्रेवराम के जीवन के बहुत संवेदनशील पक्ष का बड़ी बारीकी से विश्लेषण किया है| जो अभी तक कवियों की कलम से अछूता था| कविता में उस व्यथा को गाया है जब भगवान राम वनवास से लौटकर अयोध्या आए थे और पूरी दुनिया में उत्सव था लेकिन श्रीराम के लिए वह पितृशोक की दीवाली थी | राम का मन उस दिन कितना कचोटा होगा,उन्ही भावो को कविता के माध्यम से वर्णित करने का सुंदर प्रयास किया गया है
लंकापति रावण वध करके पहली बार अवध जब आए
राम तुम्हारे अभिनंदन में तरु पुष्प धरती हर्षाए
दीप माल जब अवध नगर के सभी भवन के द्वारों पर थी
खुशी अयोध्या राम मिलन की आंखों में पानी भर भर थी
तब विधवा माँ के हाथों में स्वागत की थाली कैसी थी
सच बतलाओ राम तुम्हारी पहली दीवाली कैसी थी
माना कि तुम मानवता के मानवता से परे कथन थे
और विधि से बड़े विधि को दिए गए तुम एकवचन थे
किंतु तुम पर तात शोक या जनता का उत्सव भारी था
हे सहज राम तब हिय तुम्हारा अंदर से कितना भारी था
आंसू के दरवाजे तुमने कितने पहरेदार बिठाए
और अयोध्या में जलते वे दीपक तुमको कितने भाए
जिस दिन दशरथहीन महल में तुमने विधवा माएं देखी
उस दिन सूर्यवंश वाले उस सूरज की लाली कैसी थी
सच बताओ राम तुम्हारी पहली दीवाली कैसी थी…..1
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